गुरु महिमा वंदना श्लोक | Sanskrit Slokas on Guru Teacher with Hindi Meaning → Shivesh Pratap My articles are the chronicles of my experiences - mostly gleaned from real life encounters. दुर्जन, परायी स्त्री और परधन में ।. एक एक क्षण गवाये बिना विद्या पानी चाहिए; और एक एक कण बचा करके धन ईकट्ठा करना चाहिए । क्षण गवानेवाले को विद्या कहाँ, और कण को क्षुद्र समजनेवाले को धन कहाँ ? भेषजमपथ्यसहितं त्रयमिदमकृतं वरं न कृतम् ॥ पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥ गुरु की सेवा करके, अत्याधिक धन देकर, या विद्या के बदले में हि विद्या पायी जा सकती है; विद्या पानेका कोई चौथा उपाय नहि ।, विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां च संयमः । | Meghraj Cloud Computing Project, ओरगेनो क्या है एवं ओरगेनो के फायदे | What is Oregano Benefits in Hindi, विवाह वर्षगांठ की बधाई संस्कृत में शुभकामनाएँ | Marriage Anniversary Wish in Sanskrit, सत्य पर संस्कृत श्लोक | Sanskrit Shlokas for Truth in Hindi, विद्यार्थियों के लिए 100 बहुत छोटे सुविचार | 100 Motivational Thoughts in Hindi for Student, किन्नर किसे कहते है | All about Transgenders, महापुरुषों के अनमोल एवं प्रेरक वचन, वाक्य, विचार, उद्धरण, motivational thoughts in hindi for student. But some of them are not so good. १ - रंगमंच का टुकड़ा- परिचय: 00:04:24 बाह्या इमे पठन पञ्चगुणा नराणाम् ॥ शस्त्रविद्या और शास्त्रविद्या – ये दो प्राप्त करने योग्य विद्या हैं । इन में से पहली वृद्धावस्था में हास्यास्पद बनाती है, और दूसरी सदा आदर दिलाती है ।, सर्वद्रव्येषु विद्यैव द्रव्यमाहुरनुत्तमम् । कान्तेव चापि रमयत्यपनीय खेदम् । विद्या विनय देती है; विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म, और धर्म से सुख प्राप्त होता है ।, कुत्र विधेयो यत्नः विद्याभ्यासे सदौषधे दाने । Guru Slokas (गुरु श्लोक ) Guru is a Sanskrit term that connotes someone who is a "teacher, guide or master" of certain knowledge. सद्विद्या यदि का चिन्ता वराकोदर पूरणे । प्रिय वचन से दिया हुआ दान, गर्वरहित ज्ञान, क्षमायुक्त शौर्य, और दान की इच्छावाला धन – ये चार दुर्लभ है ।, अव्याकरणमधीतं भिन्नद्रोण्या तरंगिणी तरणम् । Currently you have JavaScript disabled. आलसी इन्सान को विद्या कहाँ ? You Revised My past memories in class 8th to 10th class sanskrit Subject Thank You So Much for this collection. ज्ञातिभि र्वण्टयते नैव चोरेणापि न नीयते । Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परं दैवतम् Click here for instructions on how to enable JavaScript in your browser. कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम् ॥ कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम् ॥ अथवा विद्यया विद्या चतुर्थी नोपलभ्यते ॥ गाकर पढना, शीघ्रता से पढना, पढते हुए सिर हिलाना, लिखा हुआ पढ जाना, अर्थ न जानकर पढना, और धीमा आवाज होना ये छे पाठक के दोष हैं ।, माधुर्यं अक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः । कुल, छल, धन, रुप, यौवन, विद्या, अधिकार, और तपस्या – ये आठ मद हैं ।, सालस्यो गर्वितो निद्रः परहस्तेन लेखकः । कुरुप का रुप विद्या है, तपस्वी का रुप क्षमा, कोकिला का रुप स्वर, तथा स्त्री का रुप पतिव्रत्य है ।, रूपयौवनसंपन्ना विशाल कुलसम्भवाः । Click here for instructions on how to enable JavaScript in your browser. सत्संग ध्यान गुरु महाराज की शिष्यता-ग्रहण 14-01-1987 ई. अधनस्य कुतो मित्रममित्रस्य कुतः सुखम् ॥ पाठ १२. बुढापा और मृत्यु आनेवाले नहि, ऐसा समजकर मनुष्य ने विद्या और धन प्राप्त करना; पर मृत्यु ने हमारे बाल पकडे हैं, यह समज़कर धर्माचरण करना ।, विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रयो अहार्यत्वादनर्ध्यत्वादक्षयत्वाच्च सर्वदा ॥ आरोग्य, बुद्धि, विनय, उद्यम, और शास्त्र के प्रति राग (आत्यंतिक प्रेम) – ये पाँच पठन के लिए आवश्यक आंतरिक गुण हैं ।, आचार्य पुस्तक निवास सहाय वासो । आयुष्य, (नियत) कर्म, विद्या (की शाखा), वित्त (की मर्यादा), और मृत्यु, ये पाँच देही के गर्भ में हि निश्चित हो जाते हैं ।, आरोग्य बुद्धि विनयोद्यम शास्त्ररागाः । लकडे का हाथी, और चमडे से आवृत्त मृग की तरह वेदाध्ययन न किया हुआ ब्राह्मण भी केवल नामधारी हि है ।, गुरुशुश्रूषया विद्या पुष्कलेन धनेन वा । यत्न कहाँ करना ? Your email address will not be published. ४६) लक्ष्मी श्लोक / शारदा स्तवन / गणपती श्लोक पान ५ ४७) स्वामी समर्थ माला मंत्र ४८) सूर्याष्टक ४८) हनुमान चलिसा - लिंक (GauriC यांची पोस्ट) शुद्ध बुद्धि सचमुच कामधेनु है, क्यों कि वह संपत्ति को दोहती है, विपत्ति को रुकाती है, यश दिलाती है, मलिनता धो देती है, और संस्काररुप पावित्र्य द्वारा अन्य को पावन करती है ।. Rochak Post Hindi, Interesting Facts, मोटिवेशन हिंदी, अच्छे अनमोल वचन हिंदी में, संस्कृत श्लोक व अर्थ संग्रह Best Hindi Blog, आदि काल से ही हमारी भारतीय संस्कृति में शिक्षा का बड़ा महत्व रहा है| शिक्षा को अमरत्व का साधन माना गया है| “सा विद्या या विमुक्तये” का मंत्र संसार की एकमात्र हिंदू संस्कृति में मिलता है और इस तरह से हमारी संस्कृति ने सनातन काल से ही गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से शिक्षा को जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग माना है | यही कारण है कि समय समय पर हमारे ऋषि मुनियों के साथ-साथ समाज ने शिक्षा के महत्व पर आधारित संस्कृत श्लोकों की तमाम रचनाएं की जिसे आज मैं यहां संकलित कर रहा हूं मुझे विश्वास है कि यह आपको अच्छा लगेगा, संयोजयति विद्यैव नीचगापि नरं सरित् । वित्तं दानसमेतं दुर्लभमेतत् चतुष्टयम् ॥ विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् ।, पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥, कुत्र विधेयो यत्नः विद्याभ्यासे सदौषधे दाने ।, विद्याविनयोपेतो हरति न चेतांसि कस्य मनुजस्य ।, कांचनमणिसंयोगो नो जनयति कस्य लोचनानन्दम् ॥, विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम् ।, कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम् ॥, माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः ।, क्षणे नष्टे कुतो विद्या कणे नष्टे कुतो धनम्, अजरामरवत् प्राज्ञः विद्यामर्थं च साधयेत् ।, विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रयो, धेनुः कामदुधा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा ।, सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम्, तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु ॥, श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि ।, संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि वुद्धिः किल कामधेनुः ॥, ज्ञातिभि र्वण्टयते नैव चोरेणापि न नीयते ।, दाने नैव क्षयं याति विद्यारत्नं महाधनम् ॥, विद्या शस्त्रं च शास्त्रं च द्वे विद्ये प्रतिपत्तये ।, आद्या हास्याय वृद्धत्वे द्वितीयाद्रियते सदा ॥, सर्वद्रव्येषु विद्यैव द्रव्यमाहुरनुत्तमम् ।, अहार्यत्वादनर्ध्यत्वादक्षयत्वाच्च सर्वदा ॥, अपूर्वः कोऽपि कोशोड्यं विद्यते तव भारति ।, व्ययतो वृद्धि मायाति क्षयमायाति सञ्चयात् ॥, सर्वस्य लोचनं शास्त्रं यस्य नास्त्यन्ध एव सः ॥, विद्या राज्यं तपश्च एते चाष्टमदाः स्मृताः ॥, स्वच्छन्दत्वं धनार्थित्वं प्रेमभावोऽथ भोगिता ।, माधुर्यं अक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः ।, विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया ।, द्यूतं पुस्तकवाद्ये च नाटकेषु च सक्तिता ।, स्त्रियस्तन्द्रा च निन्द्रा च विद्याविघ्नकराणि षट् ॥, पञ्चैतानि विलिख्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥, दानानां च समस्तानां चत्वार्येतानि भूतले ।, श्रेष्ठानि कन्यागोभूमिविद्या दानानि सर्वदा ॥, तैलाद्रक्षेत् जलाद्रक्षेत् रक्षेत् शिथिल बंधनात् ।, तथा वेदं विना विप्रः त्रयस्ते नामधारकाः ॥. क्षणे नष्टे कुतो विद्या कणे नष्टे कुतो धनम् ॥ चित्त (मन) की परम् शांति, गुरु के बिना मिलना दुर्लभ है।, अर्थ- विद्वत्व, दक्षता, शील, संक्रांति, अनुशीलन, सचेतत्व और प्रसन्नता ये सात शिक्षक के गुण होते हैं।, अर्थ- जहाँ गुरु की निंदा होती है, वहाँ उसका विरोध करना चाहिए। यदि यह शक्य (संभव) न हो तो कान बंद करके बैठना चाहिए और यदि यह भी शक्य (संभव) न हो तो वहाँ से उठकर दूसरे स्थान पर चले जाना चाहिए।, अर्थ- विनय का फल सेवा है, गुरुसेवा का फल ज्ञान है, ज्ञान का फल विरक्ति है और विरक्ति का फल आश्रव निरोध है।, अर्थ- अभिलाषा रखने वाले, सब भोग करने वाले, संग्रह करने वाले, ब्रह्मचर्य का पालन न करने वाले और मिथ्या (झूठा) उपदेश देने वाले गुरु नहीं होते हैं।, अर्थ- गुरु शिष्य को जो एकाद (एक) अक्षर का भी ज्ञान देता है, तो उसके बदले में पृथ्वी का ऐसा कोई धन नहीं, जिसे देकर गुरु के ऋण में से मुक्त हो सकें।, अर्थ- जैसे दूध बगैर गाय, फूल बगैर लता, शील बगैर भार्या, कमल बगैर जल, शम बगैर विद्या और लोग बगैर नगर शोभा नहीं देते, वैसे ही गुरु बिना शिष्य शोभा नहीं देता।, अर्थ- योगियों में श्रेष्ठ, श्रुतियों को समझा हुआ, (संसार/सृष्टि) सागर में समरस हुआ, शांति-क्षमा-दमन ऐसे गुणोंवाला, धर्म में एकनिष्ठ, अपने संसर्ग से शिष्यों के चित्त को शुद्ध करनेवाले, ऐसे सद्गुरु बिना स्वार्थ अन्य को तारते हैं और स्वयं भी तर जाते हैं ।, अर्थ- तीनों लोक जैसे स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल में ज्ञान देने वाले गुरु के लिए कोई उपमा नहीं दिखाई देती। गुरु को पारसमणि के जैसा मानते है, तो वह ठीक नहीं है। जैसे नीचे प्रवाह में बहेनेवाली नदी, नाव में बैठे हुए इन्सान को न पहुँच पानेवाले समंदर तक पहुँचाती है, वैसे हि निम्न जाति में गयी हुई विद्या भी, उस इन्सान को राजा का समागम करा देती है; और राजा का समागम होने के बाद उसका भाग्य खील उठता है ।, विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् । रुप संपन्न, यौवनसंपन्न, और चाहे विशाल कुल में पैदा क्यों न हुए हों, पर जो विद्याहीन हों, तो वे सुगंधरहित केसुडे के फूल की भाँति शोभा नहि देते ।. यहां पर श्री राम के संस्कृत श्लोक (Shri Ram Mantra in Hindi) शेयर किये है। उम्मीद करते हैं आपको यह संस्कृत श्लोक पसंद आयेंगे। Chanakya Slokas (चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya was an Indian teacher, economist and a political adviser. In order to post comments, please make sure JavaScript and Cookies are enabled, and reload the page. माधुर्य, स्पष्ट उच्चार, पदच्छेद, मधुर स्वर, धैर्य, और तन्मयता – ये पाठक के छे गुण हैं ।, विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया । आचार्य, पुस्तक, निवास, मित्र, और वस्त्र – ये पाँच पठन के लिए आवश्यक बाह्य गुण हैं ।, दानानां च समस्तानां चत्वार्येतानि भूतले । स्वावलम्बः दृढाभ्यासः षडेते छात्र सद्गुणाः ॥ Thank you so much for all this shlokas. मेघराज GI क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है? मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ॥ नास्ति विद्यासमं वित्तं नास्ति विद्यासमं सुखम् ॥ विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय-संयम, अहिंसा और गुरुसेवा – ये परम् कल्याणकारक हैं ।, पठतो नास्ति मूर्खत्वं अपनो नास्ति पातकम् । पुस्तक कहता है कि, तैल से मेरी रक्षा करो, जल से रक्षा करो, मेरा बंधन शिथिल न होने दो, और मूर्ख के हाथ में मुझे न दो ।, दानं प्रियवाक्सहितं ज्ञानमगर्वं क्षमान्वितं शौर्यम् । Designed by Elegant Themes | Powered by WordPress, गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।, शरीरं चैव वाचं च बुद्धिन्द्रिय मनांसि च ।, गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्तेज उच्यते ।, विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम् ।, विनय फलं शुश्रूषा गुरुशुश्रूषाफलं श्रुत ज्ञानम् ।, एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्ये निवेदयेत् ।, दुग्धेन धेनुः कुसुमेन वल्ली शीलेन भार्या कमलेन तोयम् ।, योगीन्द्रः श्रुतिपारगः समरसाम्भोधौ निमग्नः सदा शान्ति क्षान्ति नितान्त दान्ति निपुणो धर्मैक निष्ठारतः ।, दृष्टान्तो नैव दृष्टस्त्रिभुवनजठरे सद्गुरोर्ज्ञानदातुः स्पर्शश्चेत्तत्र कलप्यः स नयति यदहो स्वहृतामश्मसारम् ।, पूर्णे तटाके तृषितः सदैव भूतेऽपि गेहे क्षुधितः स मूढः ।. यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते ॥ Your email address will not be published. विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः । अब वेबसाइट का यह YouTube चैनल आ गया है जहाँ आप को बहुत सुन्दर संस्कृत संग्रह और अन्य जानकारियां भी मिलेंगी। कृपया इस चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आइकॉन दबाकर हर वीडियोज़ सबसे पहले पाएं —- https://www.youtube.com/c/InfotainerWorld/. चाणक्य नीति श्लोक ) chanakya was an Indian teacher, economist and a political adviser here for instructions how. 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